STORYMIRROR

Anil Pandit

Drama Romance Fantasy

4  

Anil Pandit

Drama Romance Fantasy

साथ हम …

साथ हम …

2 mins
4

साथ हम …

फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?

 

साथ हम …

फिर भी ये  तकरार क्यों?

 

साथ हम …

फिर अश्कों के मौसम में दोनों तन्हा क्यों?

 

साथ हम …

दो बादल, दो रास्ते, एहसास एक नहीं क्यों?

 

साथ हम …

एक ही सवाल, एक ही जवाब, फिर भी ये मुश्किलों की परछाई क्यों?

 

 

साथ हम …

नाज़ुक दिलों की किताब में सब पन्ने कोरे क्यों?

 

साथ हम …

फिर भी चुपके से दूरी बढ़ती जा रही क्यों?

 

साथ हम …

फिर भी मन की राहों में बार-बार मुड़ कर  रुकना क्यों?

 

साथ हम …

फिर भी बातचीत का सिलसिला अचानक थम सा गया क्यों?

 

हम साथ …

फिर भी  हम हमेशा खामोशी में क्यों?

 

हम साथ …

फिर भी हर लम्हा बेकरार,बेबस क्यों?

 

हम साथ …

फिर भी दो शहर भीग रहे है धूप की रोशनी में क्यों?

 

 

साथ हम …

फिर भी सुकून की पलकों में सितारों की छुपी सिसकियाँ क्यों?

 

साथ हम …

फिर अब तक प्रेम के  पेड़ की पत्तियों में मौन हुई रुसवाई क्यों?

 

साथ हम…

फिर भी काग़ज़ की धडकन में तेज तूफ़ान की हलचल क्यों?

 

साथ हम…

चाहत की कलम से जुड़े दो किनारे दूर जा रहे क्यों?

 

साथ हम…

फिर भी वादों की वादियों में सुकून का रास्ता काग़ज़ का बनाया जा रहा  क्यों?

 

हम साथ…

फिर भी ये एक कहानी बेरुखी की क्यों?

 

हम साथ…

फिर भी एक भंवर लफ्जों के साथ- साथ इतना गहरा बन जाता क्यों?

 

साथ  हम…

फिर भी दो अक्स ,एक मंज़िल,बहारों की बारिश में पल-पल रुखापन क्यों?

 

साथ हम…

फिर भी ओस की बूँद में कोई नई बात नहीं क्यों?

 

हम साथ…

फिर भी अनजान ज़ज्बात क्यों?


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Anil Pandit

...

...

2 mins पढ़ें

...

...

1 min पढ़ें

...

...

1 min पढ़ें

...

...

1 min पढ़ें

...

...

2 mins पढ़ें

...

...

1 min पढ़ें

...

...

2 mins पढ़ें

...

...

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Drama