हम भी , आप भी...
हम भी , आप भी...
हम भी , आप भी...
बेरुखी भी
हम भी, आप भी...
सादगी भी
हम भी, आप भी...
शब्द भी अंगार भी
हम भी, आप भी...
बर्फ सा शीतल मौन भी
हम भी, आप भी...
चुपके से छू गई बेरुखी की हवा भी
हम भी, आप भी...
मन के चलचित्र पर दो बुँदे ओस की भी
हम भी, आप भी...
कैसे कहे दिल की कश्मकश भी
हम भी, आप भी...
काग़ज़ के लम्हों में बूँद बूँद बेरुखी की बरसात भी
हम भी, आप भी...
दिल के कोहरे में बेरूखी की बात भी
हम भी, आप भी...
किसी पुस्तक में अनजाने राहों के निशान भी
हम भी, आप भी...
संध्या में ढलने लगी एक और बेरुखी भी
हम भी, आप भी...
छाँव की पलकों में आभा का आभास भी
हम भी, आप भी...
एक अफ़साना बेरुखी का भी
हम भी, आप भी...
रेगिस्तान की लकीर में एक अनजान आवाज भी
हम भी, आप भी...
एक मुकम्मल ख़ामोशी भी
हम भी, आप भी...
बेरुखी के रंग में छुपी सी कहानी भी
हम भी, आप भी...
दिल की मुंडेर पर बैठा बेरुखी का पंछी भी
हम भी, आप भी...
बेरुखी निभाने का हुनर भी
हम भी, आप भी...
जर्द पत्तो की यादों में एक याद और भी
हम भी, आप भी...
मन की डाली से गिरते हैं बेरुखी के अश्क भी
हम भी, आप भी...
गुम जाते है जहाँ लफ्ज़ों के नादान जहाज भी
हम भी, आप भी...
आप भी,हम भी
हम भी, आप भी...
पुराने ज़ख्मों की महक भी
हम भी, आप भी...
चमन में खार भी, चमन में गेंदे के फूल भी
हम भी, आप भी...
ग़म का कोई गाव भी, बेनाम खुशियों का शहर भी
हम भी, आप भी...
अधूरी बातों की पूरी तमन्ना भी
हम भी, आप भी...
आज के लहज़े में कल की बेरुखी भी
हम भी, आप भी...
मन के भावों के आँगन में बेरुखी का शज़र भी
हम भी, आप भी...
चंद्रमा की किरणों से कौमुदी की हँसी भी
हम भी, आप भी...
साधारण से शब्दों का गहन अर्थ भी
हम भी, आप भी...
नींद की पलकों से जागे स्वप्न भी
हम भी, आप भी...
टिक-टिक घडी की धून में धडकन का साज भी
हम भी, आप भी...
वक्त की जंजीरों में इज़हार की कशिश भी
हम भी, आप भी...
बेबसी के लम्हों में बेवजह की बेरूखी भी
हम भी, आप भी...
आप भी, हम भी
बातों के मखमली धागों में, एक तोहफ़ा बेरूखी का भी
हम भी,आप भी...
एक बेरुखी का तोहफ़ा बातों के मखमली धागों में भी
हम भी ,आप भी...
आप भी ,हम भी

