मन का पेड़
मन का पेड़
दिखाई तो दे रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
हकीकत का सपना कितना काग़ज़ी था
मन का पेड़ सूख रहा था
हवा में तो घुला रंग फरेब का था
मन का पेड़ सूख रहा था
यकीन के परों पर भरोसा चांदी सा था
मन का पेड़ सूख रहा था
गहरी खाई से भरा वादा एक झूठा था
मन का पेड़ सूख रहा था
सच की मंजिल का रास्ता कितना बनावटी था
मन का पेड़ सूख रहा था
बादलों के नक्शे पर धोका ही धोखा लिखा था
मन का पेड़ सूख रहा था
कुछ ही दूरी पर अपनों का साथ सिर्फ़ छलावा था
मन का पेड़ सूख रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
कांच का ज़ख़्म ज़हन में तस्वीर बना रहा था
व्यर्थ भाव आसमान को कुछ तो कह रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
पत्तो की सरसराहट में आंसुओं का समन्दर था
दिल में बसे कल के शोर का कहना यही था
मन का पेड़ सूख रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
किसी को परवाह तो किसी को बेपरवाह कर रहा था
रात की तन्हाई में धीरे-धीरे सिसक रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
किसी के अरमानों को लहू रुला रहा था
मन का पेड़ सूख रहा था
दिखाई तो दे रहा था
