दर्द के पतझड में...
दर्द के पतझड में...
पतझड़ में उसका दिल टूटा है
दिल टूटा है पतझड़ में उसका
उसकी आवाज़ साफ-साफ सुनाई दे रही हैं
उसका दर्द, उसका दर्द अश्कों का रास्ता ढूंढ रहा हैं
आखों में जिसकी चाहत की तस्वीर थी
उस चाहत का पता सदियों से खोज रहा है
तन्हाई की लकीरें पतझड़ में दर्द की चिट्ठी पढ़ रही हैं
नैनो में अश्रू का एकाकी पतझड़ दर्द की बरसात बनकर बरसे जा रहा है
सूखे पत्तों की आवाज़ को बार-बार दिल से
दर्द की सुबह में दोहरा रहा है
कोई सुने या ना सुने
कोई प्रश्न कोई उत्तर नहीं
उसकी सिसकियाँ उसकी चाहत
लापता हो गई सूखे पत्तों की सरसराहट में
एक दर्द का शोर
उसके शब्दों में…
उसकी बातों का असर
दिल के ज़र्रे ज़र्रे में …
अश्क, आसू, नीर
एक ही दवा उसके दर्द के तूफ़ानों के …
दर्द के पतझड में...
