कौन सी ऋतु थी?
कौन सी ऋतु थी?
कौन सी ऋतु थी?
जब हवा में किसीके प्यार की सुगंध थी?
किसने कितनी प्रतीक्षा की प्रेम के बहार की?
प्यार के गीतों की सरगम किसकी थी?
जब कोई आने वाला था तो ह्रदय में
किसके नाम की धून घुल जाती थी?
कौन सी ऋतु थी?
कब और कैसे दूरियों की आहट हुई?
फिर अचानक कैसे ऋतु बदल गई?
क्यों? बातें सिर्फ़ याद बनकर रह गईं?
किस की शिकायतें उस ऋतू की महक में महक रही थी?
जहाँ प्यार था,वहाँ रोने की सदा क्यों थी?
हासिल किसीको क्या हुआ प्यार को दिल्लगी कह डाली?
धूप-छाव के आईने में,
कौन सी बातें अधूरी थी?
रूठना-मनाना किसका एक तरफ़ा था?
यक़ीन किसका कितनी बार टूटा ये यक़ीनन कौन बताएगा?
अबतक क्यूँ? उसे दिल में में संभालकर कर रखा था?
प्यार की राहों के फलक से कौन मूड कर देख रहा था?
वो ऋतु
वो सुगंध
वो शिकायतों के सिलसिले
वो मुस्कान
वो रोना
वो याद
वो दिल्लगी
क्यों? कोई भूल नहीं पा रहा था?
और धीरे-धीरे रहस्य की वेदना बनते जा रहा था?
कौन सी ऋतू थी ?
जब हवा में किसीके प्यार की सुंगध थी?

