छुपाते है शब्द,शब्द है छुपाते
छुपाते है शब्द,शब्द है छुपाते
जो किताबों में अब आने लगी हैं,
महक ये लफ्जों के फ़ूलों की,
उन्होंने लिख डाली एक कविता,
अब किसी के नाम की,
वो नाम, वो कविता
छुपाते है शब्द,शब्द है छुपाते
ज़माने भर की बातें करनेवाला,
चाँद सितारों के नक्श कविता में लिखनेवाला,
फिर भी उसके दिल की बात,
छुपाते है शब्द, शब्द है छुपाते
उन्हें सुकून कैसे मिलता है?
नजरो में एक प्रेम रहस्य बनाए रखता है
ये रहस्य भरी नज़रे किसी झील के किनारे से
कहती है
इस प्रेम रहस्य को, प्रेम रहस्य रहने दो
क्यों की,
शब्द है छुपाते, छुपाते है शब्द
शब्दों के महक में,
चांदनी भी पल-पल पूछती हैं,
ये जो उसके नज्म में,
एक चेहरा दिखाई देता है,
उस चेहेरे की कोई तस्वीर की बातें
शब्द है छुपाते, छुपाते है शब्द
हमेशा दूरीयो में जो सिमटा रहता है,
उस दूर के सितारे की,
कोई तो एक बात ,
शब्द है छुपाते, छुपाते है शब्द
रूबरू जरुर होते है,
मुस्कुराते हुई आईने में,
फिर भी कतराते है,
एक दिल की बातें कहने में,
क्यों की,
शब्द है छुपाते, छुपाते है शब्द

