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Pankaj Prabhat

Drama Inspirational Children

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Pankaj Prabhat

Drama Inspirational Children

साँस साँस आज़ादी.....

साँस साँस आज़ादी.....

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देश की नाव न डोले, लहरें कितनी भी तूफानी हों,

रात का चाँद या, दिन का सूरज, एक सी कहानी हो।

कइयों की आहुति और, कइयों का है ख्वाब ये धरती,

जन-जन की धड़कन बलिदानी, और साँस-साँस आज़ादी हो।

देश की नाव न डोले, लहरें कितनी भी तूफानी हों…..


कर्म, धर्म से होता रहे, पर धर्म न कर्म पर हावी हो,

कोई पलक न भूखी झपकें, सबकी नींदें हरियाली हों।

पीठ ज़मीन पर, सटाने न पाए, दुश्मन हमारे इरादों का,

हर दिल में हो हौसले, हर हौसला खुद में कहानी हो।

जन-जन की धड़कन बलिदानी, और साँस-साँस आज़ादी हो…..


विष्णु, महेश से होता हुआ, देश राम, कृष्ण तक आया था,

प्रताप और पृथ्वीराज ने, शौर्य से इसे सूर्य सा चमकाया था।

कइयों ने इसे लूटा-रौंदा, कइयों ने गुलामों सा रुसवा किया,

मगर देश मेरा अडिग रहा, जैसे कोई अनमिट कहानी हो।

देश की नाव न डोले, लहरें कितनी भी तूफानी हों…..


सुभाष, भगत मर-मिटे, आज़ाद, मंगल कुर्बान गए,

खुदीराम, बिस्मिल पीस गए, गाँधी-नेहरू तब जीते थे।

आज़ादी तो पाई हमने पर, मन तो जख़्मों से सींचा था।

अब वो ज़ख्म ही जज़्बा हैं, हर ज़ख्म की अमर कहानी हो।

जन-जन की धड़कन बलिदानी, और साँस-साँस आज़ादी हो…..


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