रुके बिन चलना होगा
रुके बिन चलना होगा
ये अनजाना सफ़र है
और अनजानी हैं रहें।
रुके बिन चलना होगा
तुम्हें दिन हो कि रातें।
अकेले भी हो तो ग़म क्या
सफ़र में कोई न कोई मिलेगा।
कोई कुछ दूर तक चल के
बढ़ेगा किसी मोड़ से आगे।
सपनों में देखी जो मंज़िल
सफ़र उस तक तय है करना।
तुम चलते रहो उधर अहर्निश
होगी मंज़िल आँखों के आगे।
