STORYMIRROR

Vadaliya Vasu

Drama Tragedy Others

4  

Vadaliya Vasu

Drama Tragedy Others

रो पड़ेगें हम।

रो पड़ेगें हम।

1 min
291

हाल कुछ यूं हुआ है हमारा,

अगर पुछोगे तो रो पड़ेंगे हम।


जो सपनों की दहलीज पर भी ना देखे हो,

ऐसे दिनों से गुज़र रहें हैं हम।


और कुछ नहीं बस एक रूह चाहिए,

खुदा तुझ से एक जिन्दगी उधार मांग रहे हैं हम।


ये शाम ढलने वाली हैं बरसो बाद,

उसके साथ बीते दिनों के सफर में हैं हम।


आंसुओं से गुंज उठा घर हमारा,

जाने वाले को दिलो-ओ-जान से रोक रहें थे हम।


तारो भरे आसमान का वो सितारा हो गया,

अब रात भर यादों के साथ उसे तकते हैं हम।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama