STORYMIRROR

नादानी

नादानी

1 min
395


उस रोज मेरी एक

दिलकश सी नादानी पर

लब तुम्हारे कुछ इस तरह

से मुस्करा बैठे।


कि ये कमबख्त दिल उसे

एक खेल समझ बैठा

और फिर न जाने हम

कितनी बाजियां हार बैठे।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance