मतलबी दुनिया
मतलबी दुनिया
कैसे है ये दुनिया के लोगों ,
जो सबकी गल्तियां ढूंढते है,
खुद को वो काबिल मानकर,
सबको बेवकूफ समझते है।
देखता हूं हर तरफ दुनिया में,
जो दूसरों की बुराई करतें है,
खुद को वो देवता मानकर ,
सबको अपराधी समझते है।
मतलबी है दुनिया के लोगों,
जो बेटियों की कमाई खाते है,
शतरंज की चाल वो खेलकर,
बेटियों का घर उजाड़ते है।
अजीब है आज की औलादें,
जो मां-बाप की छाया में रहते है,
मां-बाप को घर से निकालकर,
अपनी जोरु के गुलाम बनते है।
लानत है इस पापी समाज को,
जो अपने को महान मानते है,
खुद मवाली की तरह रहकर,
वो सबको काफ़िर समझतें है।
मुझे नाराज़गी है ऐसे लोगों से,
जो हर पल हैवानियत करते है?
फरियाद है "मुरली" की खुदा से,
ऐसी दुनिया क्यों तू बनाता है?
