इश्क की समझदारी
इश्क की समझदारी
एक दुजे से नजर मिलाकर,
चलो इश्क की भाषा समझ लें,
थोडा ज़ाम तुम छलका लो,
थोडा ज़ाम हम छलका लें।
एक दुजे के दिल में बसकर,
चलो धडकन का ताल मिला लें,
थोडी धड़कन तुम बढा लों,
थोडी धड़कन हम बढा लें।
एक दुजे का हाथ पकडकर,
चलो इश्क बंधन मजबूत कर लें,
थोडा एतबार तुम कर लों,
थोडा एतबार हम कर लें।
एक दुजे की बाहों में सिमटकर,
"मुरली" इश्क को महसूस कर लें,
थोडा हाथ तुम फैला लों,
थोडा हाथ हम फैला लेंं।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

