STORYMIRROR

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance Thriller

3  

Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance Thriller

तुम ही मेरा सुकून हो

तुम ही मेरा सुकून हो

1 min
0

मेरे प्यार की बहती सरिता हो,
मेरे धर की अजब शी शान हो,
फिर भी मुझे सताती रहती हो,
ओ सनम तुम ही मेरा सुकून हो।

तुम मेरे बिना नही रह सकती हो,
मुझ को दिल से प्यार करती हो।
फिर भी मुझ पर शक करती हो,
ओ सनम तुम ही मेरा सुकून हो।

बार बार झगड़ा करती रहती हो।
मै समझाउं तो मान भी जाती हो,
फिर भी अचानक चिल्लाती हो,
ओ सनम तुम ही मेरा सुकून हो।

तुम मेरे ख्वाबों की मल्लिका हो,
तुम मेरी मुरादों की वजीरात हो,
"मुरली" बन जाओ आदर्श पत्नि,
ओ सनम तुम ही मेरा सुकून हो।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama