क्या है ये जिंदगी?
क्या है ये जिंदगी?
जिंदगी एक सफर है,
कभी तो वह सरल है, तो कभी कठीन लगती है।
जिंदगी एक पहेली है,
कभी तो उसका जवाब है, तो कभी समस्या बनती है।
जिंदगी एक नैया है,
कभी तो पार ले जाती है, तो कभी मझधार में डुबाती है।
जिंदगी एक ख्वाब है,
कभी तो सच बनता है, तो कभी मायूस बनाता है।
जिंदगी एक महफिल है,
कभी तो नशीली ज़ाम है, तो कभी विष की प्याली है।
जिंदगी एक संगीत है,
कभी तो सुख का साझ है, तो कभी दुःख का ताल है।
"मुरली" जिंदगी एक खेल है,
कभी तो खेल जीताती है, तो कभी जीत भी हार लगती है।
रचना:- धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ)
