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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Thriller

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Tragedy Thriller

रहस्य

रहस्य

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किये हुए कर्मो का रहस्य छूपा रहा हूंँ,
रहस्य की ज़ाल में गहरा फस चुका हूंँ,

बाहर निकलने का रास्ता ढुंढ ढुंढकर,
घर की चार दीवारों में कैद हो रहा हूंँ।

सोचते सोचते मै अति व्यग्र बन रहा हूंँ,
किसी को कहने लिये मन से ड़र रहा हूंँ,

फायदा होगा या नुकशान वह सोचकर,
हरपल मै तन मन से मायूस बन रहा हूंँ।

रहस्य को दफ़नाने की जगह ढुंढ रहा हूंँ,
कब्रिस्तान में रहस्य को मै दफ़ना रहा हूंँ,

कब्र में से मुझ को आवाज़ सुनाई"मुरली",
मै भी रहस्य के साथ यहा दफ़न हुआ हूंँ।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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