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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

प्रेम का सुर्योदय

प्रेम का सुर्योदय

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प्रेम का सुर्योदय आज हो रहा है,
विरह का अंधेरा दूर हो रहा है।

आंखों में ख्वाबों की रोशनी फैलकर,
सांसों में मधुर महक मिल रही है।

समय भी रुक गया उसको मिलकर,
हरपल प्रेम की अनुभूति हो रही है।

इजहार व्यक्त न कर सका मै उसको,
खामोशी से मेरा संदेशा बह रहा है।

उसकी नज़र ने किया इशारा मुझको,
मन में अजीब सी मदहोंशी छाई है।

सुर्य भले ही अस्त हो जाय "मुरली",
वो मेरी बांहों में अब सिमट रही है।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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