रंगरसिया
रंगरसिया
कितनी अजीब सी बात है,
तू नही तो दिल उदास है,
तेरे संग दिल खिलता है मेरा,
तू ही मेरे मन का रंगरसिया है।
तू मेरे दिल की धड़कन है,
तू मेरे सांसो की सरगम है,
तेरे संग सूर मिलता है मेरा,
तू ही मेरे मन का रंगरसिया है।
तू मेरे नैनों का आईना है,
तेरी तस्वीर उस में रहती है,
तेरे बगैर मन तड़पता है मेरा,
तू ही मेरे मन का रंगरसिया है।
तू मेरे प्यार का राग है,
तू मेरे प्यार का आलाप है,
तेरा ही तराना गाती हूंँ "मुरली",
तू ही मेरे मन का रंगरसिया है।
रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)

