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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Drama Romance

दीदार

दीदार

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आज सुबह उठते ही तेरी याद आ गई है,
याद आते ही मेरा दिल तुझे पुकार कर रहा है।

तेरे मिलन के लिये मेरा मन तड़पता रहा है,
मेरी आँखें तेरे दीदार के लिये तरसती रही है।

तेरे वादे पे हम आज इन्तज़ार कर रहे है,
ईधर उधर मेरी नज़र तुझको ही ढुंढ रही है।

तेरा चेहरा न देखने से मायूसी छा रही है,
मेरी आँखें तेरे दीदार के लिये तरसती रही है।

तेरी तस्वीर देखकर दिल बेकरार हो गया है,
ख्वाखोंं में तेरा चेहरा मुझे दीवाना कर रहा है।

आजा ओ दिलरुबा रंगीली बसंत छा गई है,
सितारों की महफ़िल तेरे लिये सजा रखी है।

"मुरली" मेरी जिंदगी मुझे तेरे नाम करनी है।
मेरी आंँखें तेरे दीदार के लिये तरसती रही है।

 रचना:-धनज़ीभाई गढीया"मुरली" (ज़ुनागढ-गुजरात)


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