STORYMIRROR

Sonam Kewat

Romance Tragedy Action

4  

Sonam Kewat

Romance Tragedy Action

मत छीनो किसी की खुशियों को

मत छीनो किसी की खुशियों को

1 min
510

वो जो आज तुम्हारी बांहों में है 

क्या तुमने किसी और से छीना है 

खुश हो खुशियों को छीन कर

आखिर ये कैसा जीना है 


किसी और से खुशियां छीन कर 

तुम खुद को खुशनसीब समझते हो 

इतने भी खुदगर्ज मत बनो क्योंकि

तुम गैरों की खुशियों पे पलते हों


जिसे तुम किसी से छीन रहे हो

उसे तो किसी ने कमाया है

किसी गैर के अपने को छीन कर

तुमने उसे अपना बनाया हैं


किसी की आंखों में आंसू देकर 

अपने ख्वाबों को सजा रहे हों

तुम जानते हो मैं क्या कह रही हूं

क्यों खुद को बेवकूफ बना रहे हो 


अरे जो तुम्हारे हिस्से में होगा 

वो एक दिन तुम्हें मिल जाएगा 

मत छीनो किसी की खुशियों को

वो तुम्हारा कभी नहीं हो पाएगा


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance