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Sonam Kewat

Tragedy Thriller Children

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Sonam Kewat

Tragedy Thriller Children

लड़की होने का पछतावा

लड़की होने का पछतावा

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औरत सामाजिक रिश्तों में नहीं बल्कि  

समाज द्वारा बनाए गए रिश्तों में फंसी हुई है

वो पैदा होती है तो उसका किसी उम्मीद या 

फिर किसी पछतावे के साथ स्वागत होता है

अगर लड़के की उम्मीद में लड़की आ जाए 

तो शायद पछतावा होता है

और अगर लड़के के बाद लड़की आ जाए 

तो घर में लक्ष्मी के आने की उम्मीद होती है

बड़ी होने के बाद लड़की की शादी ना हो तो 

माँ बाप पर बोझ बनती है

और शादी होने के बाद वो जाने कितनों के 

बोझ तले खुद ही दबी रहती है

अब माँ बनने के बाद वो रिश्तों के नाम पर 

कुछ ना कुछ समझौता करने लगती है

अब वो खुद की नहीं बल्कि 

जाने कितनों का किरदार जीने लगती है

अंत में बुढ़ापे में जब आईने में वो खुद को देखती है

तो जाने कितने सवाल करती है

क्या माँगा जिंदगी से? 

क्या पाया जिंदगी में?

इन्ही सवालों के और जवाबों में

वो सिर्फ लड़की होने का पछतावा करती है


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