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Sonam Kewat

Tragedy Thriller

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Sonam Kewat

Tragedy Thriller

मैं त्याग दूंगी

मैं त्याग दूंगी

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मैंने देखा था दादी को अपने आँचल में

कुछ सिक्कों को बांधे हुए

जो हमेशा रखती थी गांठ लगाकर

जो गांठ कभी छूटती नहीं थी

बस उसी तरह मैंने भी अपने आँचल में 

कुछ गांठ लगाए रखा हैं


जिस गांठ में मां की दुलार, पिता की फटकार

पति की धुत्कार और लोगों के तानो का वार हैं 

इस आँचल के गांठ में बहुत कुछ है

जो मैं किसी को दिखाना नहीं चाहती

कभी-कभी तो इन गांठों को 

ढीली छोड़ देने का मन करता है

और कभी-कभी मन करता है एक झटके में

तोड़ दूं बंधन सारे और त्याग दूं


मैं ये भी जानती हूं कि 

मैं एक झटके में सब त्याग दूंगी

पर अभी मुझे इंतजार है 

सिर्फ उस वक्त का इंतजार

शायद सही वक्त का इंतजार

और मैं उस समय तक इंतजार करूंगी

मैं इंतजार करूंगी सबके जाने का

शायद इतनी दूर जाने का कि 

जहां पर किसी की पुकार ना पहुंचे

जहां पर कोई पुकारना चाहे 

तो भी उसकी आवाज न पहुंचे

और तब तक मैं इंतजार करूंगी

और इंतजार के बाद मैं सब त्याग दूंगी

मैं त्याग दूंगी मां का आंचल

मैं त्याग दूंगी पिता का प्यार

मैं त्याग दूंगी पति का मोह

मैं त्याग दूंगी बच्चे का लोभ

और इस त्याग के बाद 

मैं सिर्फ मैं रहूंगी






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