कलम और तलवार
कलम और तलवार
कभी जीतना है जिंदगी को तलवार से वार करके,
तो कभी लोगों को ज्ञान की कलम से हराना है।
कलम उठाने की ताकत भी रखो और
याद रखो कि तलवार को आखिर कब उठाना है।
क्योंकि कलम तुम्हें समाज में सम्मान देगा और
तलवार तुम्हें तुम्हारे हक का अभिमान देगा।
तुम समझदार हो अगर तुम्हे पता है कि
जिंदगी की रड़भूमि में कलम से बात नहीं की जाती
पर ज्ञान की बात आए तो याद रखो कि
किताबों पर कभी भी तलवार चलाईं नहीं जातीं।
होते हैं कुछ ऐसे भी जिनके एक हाथ में कलम
और दूसरे हाथ में तलवार होता है।
जो कलम के ज्ञान से झुकाता है लोगों को और
तलवार से रणभूमि में झुके दुश्मनों पर वार करता है।
तजुर्बे से ही अक्सर कलम की नोक में धार लाते हैं
सफलता और विफलता से ही दो धारी तलवार बनाते हैं।
