हाँ, स्वाभिमानी हूँ मैं !!!
हाँ, स्वाभिमानी हूँ मैं !!!
हाँ, स्वाभिमानी हूँ मैं !!!
जिस चौखट पे मुझे "नहीं...!!!"
सुनने को मिलता है, माँ कसम,
उस चौखट पे मैं मरते दम तक
कदम नहीं रखता...!
तो क्या हुआ, अगर मेरे दिन
फिलहाल अच्छे नहीं चल रहे हैं,
मगर फिर भी मेरे कदम
उस चौखट पे दुबारा कभी
भूलकर भी नहीं जाते...!!!
हाँ, स्वाभिमानी हूँ मैं...
और ऐसा ही हूँ मैं !!!
क्योंकि ज़िन्दगी में हर किसी को --
चाहे हो रईस या मुफलिसी का मारा,
इज्ज़त सबको प्यारी होती है,
सो, मुझे भी अपना स्वाभिमान
प्यारा है...
होगा ये दस्तूर दुनिया का,
यहाँ मतलब रहने पर
आपकी कद्र करते नहीं थकेंगे लोग,
और अक्सर वही लोग
मतलब निकल जाने पर
आपको ठोकर मारकर
दुत्कार दिया करते हैं...!
ये उनकी पुरानी आदत है
जो कभी 'नहीं सुधरेगी...!
इसीलिए मैं स्वाभिमान से
सर उठाकर जीने की 'तमन्ना' रखता हूँ...
हाँ, दुनियावालों ! कान 'खोलकर' सुन लीजिए !!!
मैं बेशक़ स्वाभिमानी हूँ।
मुझे अपने स्वाभिमान पे 'अभिमान' है...!
