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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Tragedy

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Tragedy

महत्वाकांक्षा

महत्वाकांक्षा

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"महत्वाकांक्षा" इंसान को
किसी भी हद तक
ले जा सकती है --
चाहे वो
'सकारात्मक' हो
या 'नकारात्मक' ।

इंसान अपनी
सुप्त "महत्वाकांक्षा" के वशीभूत
कोई भी कदम
उठा सकता है...!

वस्तुतः इस जीवन का
अधिकाधिक समय
हम मनुष्य
अपनी "महत्वाकांक्षा" को
पूरा करने में ही
बीता दिया करते हैं,
फिर चाहे
हमारा ज़मीर ही
वक़्त के पैरों तले
क्यों न कुचलकर
दम तोड़ दे...!!

अक्सर इंसान
अपनी असीम "महत्वाकांक्षा" की
होड़ में
दूसरों की खुशहाल ज़िन्दगी
नेस्तनाबूत कर देने से भी
पीछे नहीं हटता है...!!!

आखिर "महत्वाकांक्षा" की
इस अंधाधुंध दौड़ का
अंजाम क्या होगा ???
यही हरेक इंसान का
विचार्य विषय है ।


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