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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Tragedy

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Tragedy

ये सारा खेल है रुपयों का...!!!

ये सारा खेल है रुपयों का...!!!

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पग-पग पे ज़रूरी है रुपया...
बिना रुपये के
चल नहीं सकती 
ये ज़िन्दगी की गाड़ी...!

बंद करो ये मानवता का पंचनामा !!!
अगर जेब में नहीं तुम्हारी फूटी कौड़ी,
लोग बताएंगे तुम्हें औकात तुम्हारी...!!!

कितनी लाचार और बेकार-सी लगती है ज़िन्दगी,
जब जेब हो जाती है हलकी हम इंसानों की...!

न करें दर्शानिकता भरी खोखली बातें,
जब पेट की आग लगती है हम इंसानों की,
तब प्रवचन-भजन-कीर्तन नहीं,
ज़रूरी है भरपेट भोजन की...!!!

अगर मेरी बातें झूठी लगे तुम्हें, तो ऐ रईसजादों !
तो एक पल के लिए
फुटपाथ पे भीख मांगते
(और आँसू बहाते)
उन अनजाने चेहरों पर 
नज़र-ए-इनायत करना, 
तुम्हें यक़ीनन
रुपये की अहमीयत
मालूम पड़ जाएगी...

तो इसलिए कहता हूँ, ऐ ऐश-ओ-आराम की ज़िन्दगी जीने वालों !
तुम त्याग-तपस्या की किताबी बातें
यूँ ही किसी क़िस्मत के मारे से
करने की ज़ुर्रत भी मत करना...
वरना जवाब में तुम्हें बस 


 


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