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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Action

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JAYANTA TOPADAR

Abstract Drama Action

बदलता 'मैं' -जयंत तपादार

बदलता 'मैं' -जयंत तपादार

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मैं ये सोचता था
कि पेचीदा वक़्त एक दिन
ज़रूर अपना रंग बदलेगा ,
मगर मेरी आधी ज़िन्दगी निकल गई
यही सोचते-सोचते
कि मेरा वक़्त कब बदलेगा...!

मगर हक़ीक़त तो ये है कि
मुझे ही अपने जीने का
अंदाज़ बदलना पड़ा...!
मजबूरन मुझे ही खुद को
आईना दिखाना पड़ा...!

आखिर मैंने भी अपना
रवैया बदल दिया...!

वक़्त मेरे लिए जब
बदल ही न पाया ;
वक़्त को जब
मेरे ईमान की
कोई फ़िक्र ही नहीं,
तब मैंने ही खुद
बेरूखे वक़्त को
अपना रास्ता दिखा दिया...!!! 


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