अमूल्य योगदान
अमूल्य योगदान
निज-स्वार्थ से भरी
इस वस्तुवादी समाज की भीड़ में
मेरे माता पिता एवं भाई बहन के बाद
केवल आप ही मिले, महोदय,
जिन्होंने कोई हिसाब-किताब किए बिना ही
घोर विपदा की कंटकमय काल में
हमारी मदद की...!
महोदय, हमारे अपनों के बाद
आपने भी हमें
इतनी विफलता के उपरांत भी
सकारात्मक सोच रखते हुए
ज़िंदगी में अग्रसर होने की
अनुप्रेरणा दी ...!
हमें हालांकि
आप पर पूरा विश्वास था
कि हज़ार मुश्किलें आने के उपरांत भी
आप भी हमारे साथ
कंधे-से-कंधा मिलाकर
इस घोर मुसीबत के समय हमें
इस दौर को सार्थक रूप में गुज़ारने की
हर संभव सहारा देंगे...
महोदय, ये हमारे
संभवतः अच्छे कर्म होंगे
जो कि हमें इस भीड़ भरी
वस्तुवादी दुनिया में
आप जैसा कोई 'अपना' मिला...!!!
आपका अमूल्य योगदान हमें
ज़िंदगी की जद्दोजहद में
अनंत काल तक
निर्भय मुकाबला करने में
सही मार्गदर्शन दिया करेगा...!!!
