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Vimla Jain

Action Inspirational

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Vimla Jain

Action Inspirational

साल की अंतिम सांझ सोच रही है

साल की अंतिम सांझ सोच रही है

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यह कहां आ गए हैं हम

देखते देखते यह साल भी गुजर जाएगा

दरवाजे पर आकर साल की अंतिम सांझ खड़ी होगी ।

बीते पलों का हिसाब करेगी।

हमको सोचने पर मजबूर करेगी।

 साल 24 यह कैसा था।

 हमारे लिए तो बहुत अच्छा था। 

आने वाला समय भी अच्छा ही होने वाला है ।

इस आशा के साथ रहते हैं।

 और स्वागत करते हैं हम।

साल की अंतिम सांझ का

जो खड़ी चुपचाप कोई कथा पढ़ी।

सोच रही है मैं क्या करूं

बीते पलों का हिसाब करूं,

या फिर से नया ख्वाब बुनूं।


सर्द हवाएं गीत गुनगुनाएं,

पत्तों की सरसराहट सुनाएं।

बीते लम्हों की गूंज दिलाए,

आगे का रास्ता दिखाए।


सुख-दुख की गठरी संग बांध,

खड़ी हूं मैं इस राह के मध्य।

सपनों के दीप जलाऊं फिर,

जीवन को दूं एक नई लय।


गम भी आए, खुशियां भी,

यादें बन गईं कुछ अनकही।

इनसे मैं सीखूं, इनसे बढ़ूं,

हर दिन को और रंगीन करूं।


नए सिरे से नई शुरुआत,

साल के संग नए जज़्बात।

चलो करें अब वादा कुछ ऐसा,

खुद से प्यार, औरों का सहारा।


साल की अंतिम सांझ खड़ी,

नई सुबह की राह बढ़ी।

जो बीत गया वो सपना था,

आने वाला हर दिन अपना था।



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