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Sonam Kewat

Tragedy

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Sonam Kewat

Tragedy

प्यार पाना किस्मत में कहां

प्यार पाना किस्मत में कहां

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एक चाह से शुरू हुई बात सारी 

पर पहले थोड़ी हिचक हुई, 

चाहचाहने की चाहत मुश्किल थी 

पर जाने कैसे उससे प्यार हुआ 

मैं पास जाती रही, वो दूर जाता रहा

सिर्फ मेरी तरफ से इजहार हुआ 

मेरे बस में नहीं रहा था कुछ भी

प्यार था या पागलपन, समझा ही नहीं

कभी कायनात हंसी, कभी जग हंसा

बार-बार इस प्यार का उपहास हुआ

प्यार हद से बढ़ा तो प्रार्थना और पूजा पर अड़ा 

टूटी रहीं डोर, एक-एक कर टूटते ही रहीं

पर जाने क्यों बार-बार मिलने का आस हुआ

मैं ख्वाब सजाती रही, वो हकीकत दिखाता रहा

पर फिर भी मुझे ना विश्वास हुआ

मैं तो सब कुछ खोने को तैयार थी

पर सबके बदले प्यार को खोया, 

तब इस बात का एहसास हुआ

सही कहते हैं सभी, किस्मत हैं सबसे बड़ी

प्यार पाना सबकी किस्मत में कहाँ, 

इसीलिए यहा भी किस्मत का वार हुआ 

प्यार में जीत रही थी जो हर बारी 

अब जीती हुई बाजी में भी हार हुआ 



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