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Sonam Kewat

Classics

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Sonam Kewat

Classics

बातों की चाह

बातों की चाह

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जब दो लोगों के बीच बात नहीं हो पाती

तो बिना बातों के भी बात होती है


कभी-कभी मन ख्यालों में गुम हो जाता है

तो कभी गुमनामी में रात होती है


कभी मन चाहता है बहुत सारी बातें करना

पर जब सामने बैठे हो तो कहां बात होती है


कभी कोशिश होती है कि बिगड़ी बात बन जाए

पर जब बात करते हैं तो सारी बनी बात बिगड़ती है


बहुत कोशिश होती है बातों से बात सुलझाने की

पर बातों ही बातों से सारी बात उलझती है


इतनी कोशिश के बाद मर जाती है बातों की चाह

जो बातूनी बातें करती थी वो अब बात नहीं करती है 


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