इंतजार
इंतजार
शादी प्यार और इंतजार के चक्कर में
जाने कैसे-कैसे किस्से बने हैं,
कभी एक तरफा प्यार तो कभी दो तरफा इंकार
और यहां छुपा होता है इंतजार।
लोग कहते हैं कि जो तुम्हें चाहेगा
वो तुमसे दूर नहीं रह पाएगा,
वो एक दिन एक हफ्ते या
एक महीने भी नहीं गुजार पाएगा।
तो फिर कोई तीन साल कैसे गुजार सकता है?
सच में कितना बड़ा वहम है ये इंतजार
हर पल का वहम यही हैं कि
वो एक दिन लौटकर जरुर आएगा
पर क्या सच में आएगा? नहीं!
जिसने खुद सारे रास्ते बंद किए हो
वो ना तो खुद आएगा और
ना ही कभी सामने वाले को आने देगा,
किसी ने सच कहा था कि
अगर कोई तुम्हें पसंद करेगा
तो उसे तुम्हें खोने का डर होगा,
वो सदैव के लिए तुम्हें चाहेगा,
जो तुम्हारे बिना रह नहीं पाएगा
वो खुद से तो तुम्हें नहीं खोने देगा
वो तुम्हें किसी और का कभी नहीं होने देगा
सच तो ये है कि
अगर कोई सच में चाहता है
अगर कोई प्यार में प्यार मांगता है
तो फिर वो बात करता है,
वो बातों के बीच की उलझनों को
समझदार की तरह सुलझाता है
और वो एक बार नहीं बल्कि
हजार बार लौटकर आता है।
अगर कोई लौटकर ना आएं तो
मन को मनाना बहुत जरूरी है
क्योंकि मन सिर्फ अपनी करता है
जो सिर्फ इंतजार करना चाहता है,
पर फिर लगता हैं सब वहम तो नहीं
बस यही सोचकर सहम जाता है मन।
कोई बताए कि कितना करना है इंतजार
और कब तक हो सकता है इंतजार?
कभी इंतजार के नाम पर समझौता
तो कभी जिम्मेदारी रास्ता काट जाती है।
इस तरह किसी भटके हुए राही को
एक ही मंजिल बार-बार भटकाती है,
मन तो होता है कि आखिरी बार बात हो
और आखिरी बात में सब कुछ स्पष्ट हो कि
क्या इस रास्ते पर इंतजार करना चाहिए?
तीन साल के इंतजार का वहम कहता है कि
जो चल रहीं हूं मैं वो रास्ता ही गलत है,
ये दिख रही जो वो मंजिल ही गलत है
मेरी चीज़ो को लेकर समझ गलत है,
शायद मेरा प्यार गलत है,
और शायद मेरा इंतजार गलत है
और गलत है मेरी सारी कल्पनाएँ।
इसलिए लगता है अब रुकने में तकलीफ हैं
और आखिर कब तक रुकना चाहिए
ये भी कुछ समझ नहीं आता
क्योंकि एक तरफा इंतजार हो
या फि एक तरफा प्यार हो
कभी भी कामयाब नहीं होता
और होगा भी कैसे?
जहां दो के किस्से में एक छोड़ दें और
दुसरा पकड़े रखें वो कैसे कामयाब होगा
इसलिए थोड़ा वक्त लगता है
हाँ सब सही तो नहीं होगा
और सब अच्छा हो ये जरूरी भी नहीं
पर आसपास बहुत है समझाने वाले
कि तुम समझदार हो
और समझदार को समझौता करना चाहिए
और बस इसी तरह समझदार का समझदारी ही
उसकी सबसे बड़ी नासमझी है
