STORYMIRROR

Dinesh Dubey

Tragedy

4  

Dinesh Dubey

Tragedy

बढ़ती भीड़

बढ़ती भीड़

1 min
243

बढ़ती भीड़ देखकर कह उठे दिनेश,

अब ना कोई कुछ कर पाएगा ,

सरसो रखने की जगह न बचेगी

तो कहां रह पायेगा क्लेश।

जंगल कटते ,सागर पटते,

बस पट रहा नही ये मन,

सारा जीवन बीत गया अब,

यू ही राहों में खटते खटते।

धरती छोड़ अब आसमान पर ,

बसने की सब सोच रहे ,

ना जाने कब मां प्रकृति का ,

हो जाएगा सब पर प्रकोप ।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy