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Dinesh Dubey

Inspirational

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Dinesh Dubey

Inspirational

संतोष

संतोष

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संतोष ना हो जीवन में ,

वह जीवन व्यर्थ हो जाता है,

असंतोष को मन में धर कर ,

कोई कुछ नहीं कर पाता है ,।

संतोषम परम सुखम को मानो,

जीवन का उद्धार करो ,

सारे दुख दूर हो जायेंगे ,

अडिग रहो तुम बन संतोषी,।

असंतोष जन्म देता है हरदम,

नए नए अभाव और तृष्णा को ,

उसके चक्र में फंस कर करते ,

हम अपने खुशियों का नाश।

जो सह जाता विपरीत वेग,

संतोष पर अटल रह कर,

संवर जाती है उसकी दुनिया,

हो जाता उसका बेड़ा पार,।



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