उसे औरत ना बनायें
उसे औरत ना बनायें
उसके दिल में मचलती तरंगें ,उसे आज भी बच्चा बनाती हैं।
लाली होठों पर लगा कर ,उसे औरत ना बनायें।
संभोग के बाद भी ,उसका मन बड़ा चंचल है ,कंगना हाथों में पहना कर ,उसे औरत ना बनायें।
उसकी वो मासूम सी बातें ,उसका भोलापन निराला ,सिन्दूर माथे पर लगा कर ,उसे औरत ना बनायें।
खुल कर कहें कि वो ,अभी भी जवान है पहले जैसी ,उसको कृत्रिम मुस्कान देकर ,उसे औरत ना बनायें।
कल तक जो खेला करती थी ,गली - कूचों में बिन्दास सी ,समाज के भय से उसका विवाह कर ,उसे औरत ना बनायें।
वो बन जायेगी औरत ,खुद ~ब ~खुद एक दिन ,यूँ उसको औरत कह - कहकर ,उसका बचपन ना चुरायें।
कभी - कभी एक पूरी ,उम्र बीत जाती है ,बचपना तब भी नहीं जाता ,उसे बच्चा कहकर ऐसे ना चिड़ायें।
ये बचपन , जवानी और बुढ़ापा ,सब एक धोखा है यारों ,असली केवल आपका दिल है ,इसे हर उम्र में जवां बनायें।|
