प्रॉक्सी क्लास
प्रॉक्सी क्लास
किसी को भी भाता नहीं
है दिल से प्रॉक्सी क्लास...
अक्सर दिल पर पत्थर रखकर भी
करना पड़ता है प्रॉक्सी क्लास...!
यही बेसरकारी विद्यालयों की व्यथा-कथा...
कौन समझे दर्द-ओ-दुर्दशा
प्रॉक्सी अरेंजमेंट इन -चार्ज शिक्षक व प्रधानाध्यापक महोदय का..!!!
हालांकि कोई शौक़ से लेता नहीं अवकाश...
कभी-कभी तो किसी के अप्रत्याशित
त्यात्यागपत्र देने की वजह से भी
आ जाता है तूफ़ान किसी विद्यालय में...
या कभो कोई शिक्षक अपने ज़रूरत
के हिसाब से अवकाश लेते हैं...
वजह मगर होता हैं हर एक अवकाश का...!!
ये मानव जीवन तो निसंदेह
बिना बुलाये परेशानियों का
जीता-जागता पुतला-सा है...
किसे पता है कहाँ किसके नसीब में
क्या लिखा है...!
ये तो आनेवाला वक़्त ही बताएगा
कि कौन कैसे जीवन-सामुद्र मंथन कर
समय रुपी विष-अमृत का
सही चयन कर पाने में
सक्षम हो पायेगा...!!
ज़ाहिर है कि इस शिक्षा सेवा-पथ पर
आएंगी मुसीबतें बहुतेरे, मगर
हमें बड़े एहतियात से
अपना-अपना कर्तव्य निभाना चाहिए...
कभी नकारात्मक सोच को
हवा नहीं देना चाहिए,
क्योंकि जब अंतर्विरोध
शुरू हो जाता है,
तब विद्रोह का दवानल
एक सुन्दर सपने को भी
ख़ाक में मिला देता है...!!!
अतः आप सबसे यही गुज़ारिश है कि
आप सब 'प्रॉक्सी क्लास' की
गरिमा को बरकरार रखें...
अपने विद्यालय को इस दुनिया में
सर्वोच्च मान दें...!
