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Jalpa lalani 'Zoya'

Romance Tragedy Others

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Jalpa lalani 'Zoya'

Romance Tragedy Others

मरीज-ए-इश्क़

मरीज-ए-इश्क़

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आजकल  कुछ अजीब सा मर्ज़ हुआ है,

मर्ज़ क्या, जैसे चुकाना कोई कर्ज़ हुआ है।


जाना हुआ मोहब्बत की दार-उल-शिफ़ा में,

बोला हक़ीम तुम्हें तो दिल का दर्द हुआ है।


मर्ज़-ए-इश्क़ की महंगी पड़ी है तदबीर,

वस्ल-ए-यार का इलाज जो अर्ज़ हुआ है।


रूठा है बीमारदार इस मरीज-ए-इश्क़ का,

रूह-ए-जिस्म के पर्चे पर नाम दर्ज हुआ है।


ये साँसे तो चलती है सनम की खुश्बू से,

क्या करें! मिरा महबूब ही खुदगर्ज हुआ है।


परवा-ए-उम्मीद-ओ-बीम न कर 'ज़ोया'

इश्क़-ए-तबाही में अक्सर ही हर्ज हुआ है।



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