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Madhu Vashishta

Action Inspirational

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Madhu Vashishta

Action Inspirational

महंगाई की मार

महंगाई की मार

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पड़ी है महंगाई की मार

कहां जा सो रही सरकार।

युवा वर्ग घूमे बेरोजगार।

मिलकर रोए जार जार

बोल बोल के थक गए सारे

लेकिन काम क्यों ना कर रहे युवा बेचारे।

माता पिता तो खेती करते थे

उस खेती से ही यह पढ़ते थे।

अब इन्हें पांव में मिट्टी लगती है।

इंतजार कर रहे हैं खेती वाली जमीन कब बिकती है।

पिता कुम्हार था इसलिए बेटा शर्मसार था।

पढ़ लिख कर भी वह बेकार था।

पिता ने सारा पैसा था बेटे पर लगाया।

बेटे ने भी कर कर फैशन घर खर्चा था बढ़ाया।

इसी तरह से पुराने खानदानी कामों को सब ने बंद कराया।

पढ़ कर बैठे हैं सब देखो

अभी तक सरकार ने उन्हें अफसर नहीं बनाया।

अरे युवाओं, खाली मत रहो

जो काम मिले तुम कर डालो।

अपने खानदानी कामों में भी

शर्म ना करना उनमें ही बदलाव लाकर अपना अलग ब्रांड बना डालो।

केवल सरकार के ही भरोसे ना रहो तुम।

खुद भी कुछ तो कर डालो।

उतारकर इस फैशन का भूत

सादा जीवन और उच्च विचार की आदत डालो।

संस्कार बढ़ाओ, खर्चा घटाओ।

मेहनत इतनी कर डालो

पेट्रोल और डॉक्टर की जरूरत ही नहीं पड़ेगी

थोड़ी थोड़ी दूर के लिए पैदल या साइकिल पर जाने की आदत डालो।



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