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Anju Singh

Abstract


4.4  

Anju Singh

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मेरी डायरी

मेरी डायरी

2 mins 120 2 mins 120

मेरी अनमोल डायरी

बहुत कुछ कहती है

मेरे मन की भावनाएं 

कुछ मुस्कुराती कल्पनाएं

कुछ खुद की लिखी कविताएं


अक्सर मन में 

उलझी हुई बातों को 

समेट लेती हूं इसके अंदर

जो किसी के समक्ष 

कह नहीं पाती


समय बदल जाते हैं 

रास्ते बदल जाते हैं

खुद हम बदल जाते

पर कुछ नहीं बदलता

तो वो है मेरी डायरी


डायरी में लिखती हूं 

अपनी अनुभूति व जज्बात

हो जाती है पुरानी 

यादों से मुलाकात


कभी टूटे हुए ख्वाबों की 

चुभन लिखती हूं

कभी रोते हुए आंखों की 

जलन लिखती हूं


कभी ख्वाबों की

ऊॅंची उड़ान लिखती हूं

कभी मन से जुड़े

अरमान लिखती हूं


कुछ लोगों के लिए 

जब भर जाती है डायरी

शायद रद्दी हो जाती पर

अतीत के किस्सों से भरी 

मेरी जिंदगी है मेरी डायरी


कितने ही गिले शिकवे समेटे

ना जानें कितने ही 

सवाल किया करती है

मेरी डायरी भी ना 

कई कमाल करती है

कभी दुख के अनुभव

कभी खुशी के पल दिखाती है


मन के उथल-पुथल को

लिख देती हूं डायरी में

कह डालती हूं व्यथा सारे

शांति मिल जाती है

मन को हमारे


मन जब उदास होता है

पलट लेती हूं कुछ पन्ने

अपने इस डायरी के और

खुश हो लेती हूं जी भर के


 शायद इसे समझना 

बहुत कठिन लगता हो

कुछ लोगों को

पर मेरी डायरी मेरे

सारे ग़म सुन लेती है

भले ही बाॅंट ना पाए

पर मन हल्का कर देती है


ऐ वक्त हो सके तो 

तुम मेरी डायरी का 

अदब हिस्सा बन जाना

फिर खयाल वही जज्बात वही

क्योंकि इस डायरी में 

कोई भी रफ़ पृष्ठ नहीं


सुनहरी यादें ऐसी है सिमटी

कि मेरी डायरी कोहिनूर हो गई

देखा जो पुराने उस पल को

यह तो आंखों का नूर हो गई


जिंदगी के सारे मोड़

सिमटे हैं इस डायरी में

पर इंसान अपनी 

जिंदगी का आखरी पन्ना 

कहां लिख पाता है

चाहें जितना भी लिखूं

कुछ ना कुछ रह जाता है



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