STORYMIRROR

Anjana Singh (Anju)

Abstract

4  

Anjana Singh (Anju)

Abstract

खुदरंग

खुदरंग

1 min
333

बनावटी इस रंगीन दुनिया से

कभी बेरंग मैं हो जाऊं

अपने ही रंग में रंग कर 

मैं खुदरंग हो जाऊं


समुंदर के खारे पानी से हटकर

मीठे जल का सा एहसास हो जाऊं

हिना से भी खूबसूरत रंग है जो

उस खुद रंग में रंग जाऊं


उमंग से जीने के

जुनून से मैं भर जाऊं

खुद के रंगों में रंग कर 

सुकून मैं पा जाऊं


कभी दुनिया के रंगों से परे 

खुद की राह बना पाऊं

अपने अस्तित्व को 

खुद के रंग में रंग लाऊं


मन के अंदर के तूफान को

शांत कर मीठा दरिया बन जाऊं

मन के रंग में रंग कर

 मैं खुद रंग हो जाऊं


खुद के अंदर है सब रंग

यह यकीन मैं कर पाऊं

अपने ही रंग में रंग कर

 मैं खुद रंग हो जाऊं


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract