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Arun Gode

Thriller

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Arun Gode

Thriller

मेरा खाब.

मेरा खाब.

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                           मेरा खाब.

आँखों-आँखों में हुआँ एकरार, 

आखों में मेरे बसी तेरी तस्वीर।

दिलने तस्वीर को शीघ्र पढ़कर,

दिल में दौड़ी तेज इश्ककी लहर।

 

मैं हूँ तेरा पहला राहगीर,

तू हैं मेरे मंजिल आखरी।

अब तक थे हम नदीके दो किनारे,

हमें मिलना है नदी के किसी मोड पर।

 

आगे तय करना है जिंदगीका सफर,

बनाकर एक दूजे के प्रबल हमसफर।  

नदीका सफर शुरू पहाड़ों से निकलकर,

नदीका सफर रुकता सागर में मिलकर।

 

ये सफर शुरू हूँआ जवानी की दहलीज पर,

वो खत्म होगा एक दूजे के साँसे रुखकर।  

काश ऐ खाब बदल जाएं हकीकत बनाकर,

जिंदगी बनजाएंगी सफल इस धरापर आकर।

  

जन्मों-जन्मों का साथ हम निभाएंगें,  

स्वर्ग में अपना कायम स्थान पाकर।  

ऐ सभी मेरे अपने है पावन विचार,

तेरा साथ मिला तो देंगे उसे धार।


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