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BIKRAM NAYAK

Tragedy Thriller

4.7  

BIKRAM NAYAK

Tragedy Thriller

द लास्ट पेज ऑफ माई लाइफ

द लास्ट पेज ऑफ माई लाइफ

1 min
460


था मैं नींद में और मुझे इतना सजाया जा रहा था

बड़े प्यार से मुझे नहलाया जा रहा था


ना जाने था वो कौन सा अजब खेल मेरे घर में

बच्चो की तरह मुझे कंधे पर उठाया जा रहा था


था पास मेरा हर अपना उस वक़्त

फिर भी मैं हर किसी के मन से भुलाया जा रहा था


जो कभी देखते भी न थे मोहब्बत की निगाहों से

उनके दिल से भी प्यार मुझ पर लुटाया जा रहा था


मालूम नही क्यों हैरान था हर कोई मुझे सोते हुए देख कर

जोर-जोर से रोकर मुझे जगाया जा रहा था


काँप उठी मेरी रूह वो मंज़र देख कर

जहाँ मुझे हमेशा के लिए सुलाया जा रहा था


मोहब्बत की इन्तहा थी जिन दिलों में मेरे लिए

उन्हीं दिलों के हाथों, आज मैं जलाया जा रहा था !


इस दुनिया मे कोई किसी का हमदर्द नहीं होता,

लाश को शमशान में रखकर अपने लोग ही पूछ्ते हैं,

"और कितना वक़्त लगेगा"


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