तुम्हारा एहसास.
तुम्हारा एहसास.
तुम्हारा एहसास.
गरम हवाओं में तुम्हारी जुलफे देती,
मुझे ठंड का गहरा-गहरा सा एहसास।
ठंड हवाओं में तुम्हारी सांसें देती,
मुझे गर्मी का हलका-हलका सा एहसास।
तुम्हारी एक नजर और हलकी मुस्कान,
मेरे खाली जीवन में भर देती है उमंग।
होता है मुझे हमेशा सुकून का एहसास,
जैसे लगता धरापर सारा जहाँ मिल गया।
तुम्हारे बिना जीवन में रहता बड़ा खालीपन,
खाली जीवनसे रिहाई की गुहाँर लगाता दीवानापन।
जैसे राधा अपने कन्हैया से मिलनेका रखती जुनून,
वैसे कैदसे रिहाई की गुहाँर लगाती मेरा पागलपन।
तुम्हें अक्सर मिलने के लिए,
मैं बहती हवाओं में संदेश भेजता हूँ।
जहां से तुम्हारी साँसे घुली मदहोश हवाएं,
मुझे तुम्हारा सही सलामत होने का एहसास देती है।
काश ऐ बहती हवाएं,
मेरा साथ ना देती।
तो तुम्हारे बदन की खुशबूका,
मुझे एहसास ना कभी देती।
इन हवाओं का मैं क्यूँ ना हो दीवाना,
जो मुझे अक्सर तेरा दीवाना बनाती।
जो मुझे जवानी की कैद में भी,
तुम मेरे साथ होनेका एहसास देती।
बादलों को जब भी में आसमान में देखता,
तुम जिधर हो उधर ही जाने का संदेश देते।
काश मैं अपना पैगाम इन मेघोंपर लिख पाता,
मेघदूत बने बादलों को काश तुम पढ़ लेती।
इन काली घटाओं में तुम्हें,
मिलने की तमन्ना नहीं जगती।
इन तूफानों में मिलने की ख्वाईश,
मेरे दिल में कभी नहीं होती।

