अशांती.
अशांती.
अशांती
स्वतंत्रता सेनानीओं का था आजादी का सपना,
जिसके लिए उन्होंने दिया था सर्वोच बलिदान।
उनके बलिदानसे प्यारे तिरंगेने छुआ आसमान,
जिसे देखकर सेनानीओं को मिला था समाधान।
आजादी की उम्र लगातार बढ़ती गई,
राजनेताओं की साख निरंतर गिरती गई।
हर नेता को करना हैं अवैधरूप से कमाई,
राजनीति बना आसान आर्थिकस्त्रोत उगाई।
सभी देशवासी की चाहत थी समाजवाद,
लोकशाहीसे लाना था देश में समाजवाद।
भ्रष्ट नेता,दक्षिणपंथी और पूंजीवादीयोंने,
आमजनता किई दिशाभूल और जूगलबंदी।
लोकशाही मार्गसे लाना था सूबे में समाजवाद,
लेकिन समाजवाद जगह आया देशमें पूंजीवाद।
मूकदर्शक बनी देश में लोकशाही व समाजवाद,
भ्रष्ट नेता,दक्षिणपंथी व पूंजीवादीयोंको धन्यवाद।
देशमें बढ़ी आर्थिक ,सामाजिक व राजकीय असमानता,
इससे देश में बढ़ रहा धीरे-धीरे जनआक्रोश व अशांती।
जन अशांती से हो सकती हैं देश में रक्तरंजीत क्रांती,
देश की साझा विरासत यथावत रखसक्ती है लोकशाही।
