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Arun Gode

Romance

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Arun Gode

Romance

बेचारा पति.

बेचारा पति.

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बेचारा पति

मैँ तो निकला इंडिया,लंदन छोड़-छाड़कर, 

भतीजी की शादी के लिए दिल थामकर।   

मुझसा दिवाना पति नहीं होगा, 

दुनिया में नीले गगण के तले। 


बीबी हैं कातील, मेरे आगे-आगे, 

और ये दिवाना पति उसके पीछे-पीछे। 

वह लाल रंग के साड़ी में,

बीबी मेरी कातील लगती है। 

 

उसकी लाल रंग की साड़ी,

मुझे हमेशा बेहाल करती हैं। 

जैसे उसके साड़ीका रंग होता है,

वह, नवरात्री की देवीयों अवतार लगती है।

 




जैसे उसके साड़ीयों रंग होता है, 

वैसे ही उसका अंदाज होता है। 

लाल रंग के साड़ी में,

बीबी मेरी हसीन कातील लगती है।


अलग-अलग साड़ियों में सालीयां भी,

बीबी जैसी नमकीन कातील लगती हैं। 

बीबी और सालीयों के हमले में,

पती-जीजा के बुरे हाल होते है।

 

लाल रंग के साड़ियों में, बीबी और सालीयां,

हसीन,जवान,नमकीन कातिल लगती हैं। 

उनके ये बहुरूपी रंग पती-जीजा के,

हर पल-पल पर होश उड़ा देते हैं। 


पोते-पोतीयां भी इन से बढ़ाकर,

मुझपर कातिलाना हमला करते है। 

दादा-नाना आप कुछ नहीं समझेगें,

बात-बात पर कहके चुप करा देते हैं। 


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