"लिपट कर रोना है मुझको"
"लिपट कर रोना है मुझको"
फिर से मां के आंचल से लिपट कर सोना है मुझको।
बहुत थक गई हूं अब जी भर कर रोना है मुझको।।
ख़ुद के अफसानों से निकाल कर सारा हाल सुनाना है मुझको।
जी उठूँ लिपटकर उससे अब यह सच दिखलाना है मुझको।।
साँसे कब से सिसक रही हैं यह भी तो बतलाना है मुझको
मां तेरे आंगन में फ़िर झूम के नाचूँ ख़ुशी ये भी दिखलानी है मुझको।।
समझ सके सब मेरी बाते यह हुनर पूछना है मुझको।
उलझा कर अपनी बातों में सारे राज बतलाना है मुझको।।
कैसे निभाती हो सारे रिश्ते यह भी सीखना है मुझको।
मां अब और कहीं नहीं जाना बस तुझ में खोना है मुझको।।
