End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Tragedy


4  

गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Tragedy


कर्म कहां है??

कर्म कहां है??

1 min 264 1 min 264

सिंहासन आरुढ़ सत्तासीन सत्ता पे ही आसीन हो गए,

सर्पों सी नाचती जनता हाथों में इनके बीन हो गए ।

सृजनकर्ता हे!रोजगार सृजक वादों का वो धर्म कहाॅं है?

बल बली बलवान हुए कहो यौवन का कर्म कहां है?


जवान कंधों पर पुष्प हार से नेत्रृ नेतृत्व किए थे,

शुभ कार्य शुभमंगल परोपकारी सारे कृतित्व किए थे ।

जो घर-घर घूमकर वादे किए थे वो सत्यनिष्ठ सत्कर्म कहाॅं है?

बल बली बलवान हुए कहो यौवन का कर्म कहां है?


आवाहन से उबलते रक्त में विद्युत संचार हो जाएगा,

नेतृत्व हो गांधी सा तो सब ओर सदाचार हो जाएगा ।

हे पालक सदा सहायक तुममें समाज का मर्म कहाॅं है?

बल बली बलवान हुए कहो यौवन का कर्म कहां है?



Rate this content
Log in

More hindi poem from गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Similar hindi poem from Tragedy