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Suresh Koundal

Abstract Tragedy Inspirational


4.5  

Suresh Koundal

Abstract Tragedy Inspirational


फ़रिश्ते : कोरोना वीर

फ़रिश्ते : कोरोना वीर

1 min 287 1 min 287

विश्व युद्ध है कैसा छिड़ गया

विध्वंस धरती पर इस तरह हो रहा।

एक अनचाहा अनजाना सा शत्रु

निरन्तर है प्राणों को हर रहा।।


सिहर उठी है सृष्टि सारी

लड़ने की हो रही तैयारी।

अदृश्य शत्रु है ये अति बलशाली

पड़ रहा है सब पर ये भारी।।


ढाल बन कर रक्षा करने को

है डटी हुई एक फ़ौज न्यारी।

जन मानस की जान बचाने

दूर भगाने ये महामारी।।


पहन कर तन पर सफेद वर्दी

ढाल बने हैं ये स्वास्थय कर्मी।

अपनी जान का दांव लगाकर

डटे हुए हैं

डॉक्टर नर्सें और सफाई कर्मी।


सड़कों पर खाकी का पहरा 

चाहे आंधी बारिश या गर्मी।

जनमानस की जान बचाने

डटे हुए हैं ....सुरक्षाकर्मी।।


दुनिया को इक राह दिखाने

भला बुरा सबको समझाने

दबी हुई आवाज़ उठाने

डटे हुए हैं मीडिया कर्मी।।


ये फरिश्ते हैं दुनिया की आस

जिन पर है सब को विश्वास ।

ये विश्वास न डगमगाने पाए

जब तक हैं इस तन में श्वास।


आओ इनका साथ निभाएँ

ना घर से बाहर कदम बढ़ाएं 

समाजिक दूरी का पालन करके

"करोना वीरों" के कंधों का बोझ घटाएं।


मास्क ज़रूरी है चेहरे पर

निरंतर हाथों को धोते जाएं

इस भयंकर शत्रु को हराने में

हम भी अपना फ़र्ज़ निभाएं।।

हम सब अपना फर्ज निभाएं।।


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