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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

Fantasy Others

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गुलशन खम्हारी प्रद्युम्न

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मनमोहन की बजती मुरलिया...

मनमोहन की बजती मुरलिया...

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नाच नचाए रूप सलोना,

   नाचे देखो ताल तलैय्या...

मधुर-मधुर मधु पान कराए,

  मनमोहन की बजती मुरलिया....


तुम हो स्वामी प्रेम नगर के,

   दे दो दर्शन भगवन मेरे ।

सब में दिखता रुप तुम्हारा,

   पतझड़ मैं तुम सावन‌ मेरे ।।

फीकी-फीकी मेरी बोली,

   बोल सुनाए कुक कोयलिया..

मधुर-मधुर मधु पान कराए,

   मनमोहन की बजती मुरलिया....


नैनों की प्रिय भाषा समझो,

  अधर प्यास से तड़प रही हैं ।

भू भू के तुम रोम रोम में,

  पलक अभी फड़क रहे हैं ।।

प्रेम जाल के सब हैं कैदी,

  कैद कराए वही बहेलिया...

मधुर-मधुर मधु पान कराए,

  मनमोहन की बजती मुरलिया....


ध्वनि सुने जब उस मुरली की,

   सुध-बुध खोई ग्वालन सारी ।

पुष्पित पल्लव प्रेम पिपासी,

   अनिमेषी हों मालन सारी ।।

खुले नैन हैं प्रेम गली में,

  सखी मरोड़े देख ॲंगुलिया...

मधुर-मधुर मधु पान कराए,

  मनमोहन की बजती मुरलिया...



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