रेत का पुल
रेत का पुल
कितने वादे कितनी कसमें हमने खाई थीं,
कितनी खूबसूरत वो प्यार की दुनिया थी,
कितनी आसानी से तुम सारे वादे गए भूल,
क्यों प्यार ही बन गया मेरी जिंदगी का शूल,
एक तूफ़ान क्या आया सब कुछ ढह गया,
मानों यह रिश्ता नहीं, था कोई रेत का पुल,
कितने खूबसूरत ख्वाब साथ हमने देखें थे,
संग गुज़रे वो पल वो, लम्हे कितने खास थे,
हमने सच्चे दिल से तुम्हें किया था कुबूल,
आख़िर क्या कसूर था क्या हो गई थी भूल,
वो लम्हें, वो ख्वाब एक पल में बिखर गए,
मानों यह रिश्ता नहीं, था कोई रेत का पुल,
मोहब्बत हमें भी थी मोहब्बत तुम्हें भी थी,
पर किस्मत की शायद इसमें मर्जी नहीं थी,
खिलने से पहले ही मुरझा गया प्यार का फूल
किस्मत ने उड़ाई हमारी मोहब्बत पर ऐसी धूल,
चाह कर भी अपने प्यार को हम संभाल न सके,
मानो यह रिश्ता नहीं, था कोई रेत का पुल।
