STORYMIRROR

Soni Pandey

Tragedy

4  

Soni Pandey

Tragedy

मुक्त

मुक्त

1 min
365

मैं मुक्त हूँ अब

भावनाओं से

भूमिकाओं से

बोझिल रिश्तों से

खाली पैर

और खाली हाथ

चलना है

पिछला कुछ लिया नहीं

आगे शायद जल्दी

कुछ मिलेगा नहीं

अब शून्य हूँ

निःशब्द हूँ

मौन हूँ

पर भीतर

तूफान मचा है

किससे कहूँ

किसे समझाऊं

मुक्त होकर भी

मौन पसरा है

मेरे रोम-रोम में ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Soni Pandey

मुक्त

मुक्त

1 min पढ़ें

Similar hindi poem from Tragedy